Anup Jalota - Jaise Suraj Ki Garmi Se Jalte Huye Tan Ko (Ram Bhajan) - перевод текста песни на русский

Текст и перевод песни Anup Jalota - Jaise Suraj Ki Garmi Se Jalte Huye Tan Ko (Ram Bhajan)




Jaise Suraj Ki Garmi Se Jalte Huye Tan Ko (Ram Bhajan)
Как тень дерева для тела, горящего от солнечного зноя (Рам Бхаджан)
जैसे सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाये तरुवर की छाया
Как тень дерева для тела, горящего от солнечного зноя,
ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला हैं मैं जब से शरण तेरी आया,
Такое же счастье обрёл я, любимая, с тех пор, как пришёл под твоё крыло,
मेरे राम
Мой Рам,
जैसे सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाये तरुवर की छाया
Как тень дерева для тела, горящего от солнечного зноя.
भटका हुआ मेरा मन था कोई, मिल ना रहा था सहारा
Блуждал мой разум потерянный, не находя опоры,
लहरों से लड़ती हुई नाव को जैसे मिल ना रहा हो किनारा
Словно лодка, борющаяся с волнами, не видящая берега,
उस लड़खड़ाती हुई नाव को जो किसी ने किनारा दिखाया
Этой колеблющейся лодке кто-то указал путь к берегу,
ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला हैं मैं जब से शरण तेरी आया, मेरे राम
Такое же счастье обрёл я, любимая, с тех пор, как пришёл под твоё крыло, мой Рам.
जैसे सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाये तरुवर की छाया
Как тень дерева для тела, горящего от солнечного зноя.
शीतल बने आग चंदन के जैसी, राघव कृपा हो जो तेरी
Пусть твоя милость, о Рагхав, будет прохладой, как сандаловая паста на огне,
उजियाली पूनम की हो जाए रातें, जो थी अमावस अंधेरी
Пусть ночи, что были темны, как новолуние, станут яркими, как полная луна,
युग युग से प्यासी मरूभूमी ने जैसे सावन का संदेस पाया
Словно иссохшая веками пустыня получила весть о муссоне,
ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला हैं मैं जब से शरण तेरी आया, मेरे राम
Такое же счастье обрёл я, любимая, с тех пор, как пришёл под твоё крыло, мой Рам.
जैसे सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाये तरुवर की छाया
Как тень дерева для тела, горящего от солнечного зноя.
जिस राह की मंज़िल तेरा मिलन हो, उस पर कदम मैं बढ़ाऊ
По пути, что ведёт к встрече с тобой, я сделаю шаг,
फूलों में खारों में, पतझड़ बहारों में, मैं ना कभी डगमगाऊ
Среди цветов и шипов, в листопад и весну, я никогда не поколеблюсь,
पानी के प्यासे को तकदीर ने जैसे जी भर के अमृत पिलाया
Словно измученному жаждой судьба даровала напиться нектара досыта,
ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला हैं मैं जब से शरण तेरी आया, मेरे राम
Такое же счастье обрёл я, любимая, с тех пор, как пришёл под твоё крыло, мой Рам.
जैसे सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाये तरुवर की छाया
Как тень дерева для тела, горящего от солнечного зноя.






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