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सर झुका के, कर सलाम है
शाम शानदार
आसमां से गिरी है
शाम शानदार
चक दे अँधेरा, चाँद जला दे
बल्ब बना के
फ़िक्र ना करियो, करना भी क्या है
बिजली बचा के
सरेआम पिला ख़ुशी के जाम शानदार
आसमां से गिरी ये शाम शानदार
जज़्बात के चिल्लर, को नोट बना के
मेहंदी रात पे खुल के लूटा
चिंगारियों को, विस्फोट बना के
अय्याशी के तू रॉकेट छुड़ा
कैसा डर, तू कर गुज़र, ये काम शानदार
आसमां से गिरी ये शाम शानदार
ये शाम शानदार



Autor(en): Amit Trivedi, Amitabh Bhattacharya


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