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चल एक दफा तो मान भी लूँ कि मैं
कुछ ज़्यादा ही हस्ता फिर रहा हूँ मैं
क्या आज है वो हसींन सी सुबह
गायब मेरे सर पे से ग़म का साया
चल एक दफा तो मान भी लिया
खुश हूँ मैं, तुझे यही तो था सुन्ना?
पर मेरा दिल ख़ुशी से भी घबराये
बेचारा पूछ रहा है तब से...
इन् खुशियों का क्या करते हैं?
इन् खुशियों का क्या करते हैं?
इन् खुशियों का क्या करते हैं?
रख ले, खुशियां रख ले तू
रख ले, खुशियां रख ले तू
रख ले, खुशियां रख ले तू
ये घर बनते हैं टूटने के लिए
आशिक़ मिलते हैं रूठने के लिए
यादों को करके इकट्ठा मैं आऊं
दिल तोड़के अब सबका मैं गाउँ
माँ कहती है तू हस्ता क्यों नहीं!
तेरा चेहरा ऐसा सा तो था नहीं
ये सुनकर मैंने भी मुस्कुरा दिया
खाली झोली रखके सामने पुछा...
इन् खुशियों का क्या करते हैं?
इन् खुशियों का क्या करते हैं?
इन् खुशियों का क्या करते हैं?
रख दे, खुशियां रख दे तू
रख दे, खुशियां रख दे तू
रख दे, खुशियां रख दे तू
रख दे, इस झोली में
रख दे, खुशियां रख दे तू
रख दे, खुशियां रख दे तू
रख दे, खुशियां रख दे तू
रख दे, मेरी माँ
रख दे, खुशियां रख दे तू
रख दे, इस झोली में
रख दे, खुशियां रख दे तू
रख दे, मेरी माँ
रख दे, खुशियां रख दे तू
रख दे, इस झोली में
रख दे, खुशियां रख दे तू
रख दे, मेरी माँ...



Autor(en): Venugopal Shah



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