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कैसी हसीन आज बहारों की रात है
एक चाँद आसमाँ पे है, एक मेरे साथ है
ओ, देनेवाले, तूने तो कोई कमी ना की
अब किसको क्या मिला, ये मुक़द्दर की बात है
छाया है हुस्न-ओ-इश्क़ पे एक रंग-ए-बेख़ुदी
छाया है हुस्न-ओ-इश्क़ पे एक रंग-ए-बेख़ुदी
आते हैं ज़िंदगी में ये आलम कभी-कभी
हर ग़म को भूल जाओ, ख़ुशी की बारात है
एक चाँद आसमाँ पे है, एक मेरे साथ है
आई है वो बहार कि नग्मे उबल पड़े
ऐसी ख़ुशी मिली है कि आँसू निकल पड़े
होंठों पे हैं दुआएँ, मगर दिल पे हाथ है
अब किसको क्या मिला, ये मुक़द्दर की बात है
मस्ती सिमट के प्यार के गुलशन में गई
मस्ती सिमट के प्यार के गुलशन में गई
मेरी ख़ुशी भी आप के दामन में गई
भँवरा कली से दूर नहीं, साथ-साथ है
अब किसको क्या मिला, ये मुक़द्दर की बात है
कैसी हसीन आज बहारों की रात है
एक चाँद आसमाँ पे है, एक मेरे साथ है



Autor(en): Shakeel Badayuni, Naushad



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