Khoji - Akalmandi Lyrics

Lyrics Akalmandi - Khoji




मैं घर टोह ले
बैरण या मोह ले
दिखावै आली चीज़
बसदे उजाड़ दे
पत्थर नै पाड़ दे
माड़ी होवे भाई या
बहकावे आली चीज़
करै अपणा तै दगा
बणै दूसरयां का सगा
उरै अक़्लमन्दी लापता है
दावे आली चीज़
समझण नै जमाना
हाँ
कुदरत का खजाना
समझण नै जमाना
कुदरत का खजाना
चढ़ी पड़ी गर्द
अफसाने पै अफसाना
अय्यार तो पैर पैर
बहोत शूरवीर रहे
खुद रै निशाना
कदे बणकै नै तीर रहे
जिन पाच्छै
माड़े आच्छे
उम्र भर अधीर रहे
रियासत ये सूनी पड़ी माट्टी
माट्टी मं शरीर गए
राजे गए बजीर गए
खाली हाथ रब धौरे
अमीर तै अमीर गए
करड़े थे कई क़िस्से
छोड़ तक़रीर गए
कुदरत की नज़ाकत
रै मेहरबाँ कदे आफ़त
या बर्थ अर बाद मं
बुलावे आली चीज़
या बर्थ अर बाद मं
बुलावे आली चीज़
बसदे उजाड़ दे
पत्थर नै पाड़ दे
माड़ी होवे भाई या
बहकावे आली चीज़
आजा धौरे बैठ तेरा
दूर करूं ब्लेखा
कहंदा दादा मुंशीराम
जांडली मं देख्या
कौण भला बंदा जो
छल नै ना लपेटा
किसका भ्रम सै जो
टैम नै ना मेटया
भीतर जो बैठया
लेरया तेरा लेखा
कदे छोड़े free
कदे ढील कोनी देता
कदे त्रेता
कलजुग बरगी
ज़िंदगी प्रेम
कदे युद्ध बरगी
खुद कै रै धौरे कदे
लाग कै तो देख
कोय शय नी दुनिया मं
खुद बरगी
थी मेरी क्यांतैं बैरण या
बुद्ध मरगी
सुध मरगी
पाच्छै तै महसूस
पछतावे आली चीज़
बसदे उजाड़ दे
पत्थर नै पाड़ दे
माड़ी होवे भाई या
बहकावे आली चीज़
करै अपणा तै दगा
बणै दूसरयां का सगा
उरै अक़्लमन्दी लापता है
दावे आली चीज़
जिनकी जड़ां कै मंखा
प्यार लाग गै
टहणियां कै उच्च
विचार लाग गे
Art of living के
आसार लाग गे
कद कै रै खोजी वें तो
पार लाग गे
आपाधापी माचणी या
लाजमी दोस्त
अक्लां कै जी दिन भी
बाजार लाग गे



Writer(s): Manoj Manoj



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