Kumar Sharma - Khamosh Hai Lab Lyrics

Lyrics Khamosh Hai Lab - Kumar Sharma




ग़ज़ल से पहले चंद शेर अर्ज़ कर रहा हूँ
तअज्जुब चाहूँगा आप लोगों का
चंद फेंके हुए सिक्कों से नहीं मिलता है
शेर पर ग़ौर करेंगे कि
चंद फेंके हुए सिक्कों से नहीं मिलता है
चंद फेंके हुए सिक्कों से नहीं मिलता है
इल्म इंसान को पैसों से नहीं मिलता है
उस की उम्मीद उसे तोड़ के रख देती है
उस की उम्मीद उसे तोड़ के रख देती है
किसकी
उस की उम्मीद उसे तोड़ के रख देती है
सुख अगर बाप को बेटों से नहीं मिलता है
बहार का आज पहला दिन है
चलो चमन में टहल के आएँ
फ़ज़ा में ख़ुशबू नई नई है
गुलों में रंगत नई नई है
ख़मोश लब हैं झुकी हैं पलकें
दिलों में उल्फ़त नई नई है
ख़मोश लब हैं झुकी हैं पलकें
दिलों में उल्फ़त नई नई है
अभी तकल्लुफ़ है गुफ़्तुगू में
अभी तकल्लुफ़ है गुफ़्तुगू में
अभी मोहब्बत नई नई है
ख़मोश लब हैं झुकी हैं पलकें
दिलों में उल्फ़त नई नई है
ख़मोश लब हैं झुकी हैं पलकें
दिलों में उल्फ़त नई नई है
शेर सुनें
ज़रा सा क़ुदरत ने क्या नवाज़ा?
ज़रा सा क़ुदरत ने क्या नवाज़ा?
कि के बैठे हो पहली सफ़ में
ज़रा सा क़ुदरत ने क्या नवाज़ा?
कि के बैठे हो पहली सफ़ में
अभी से उड़ने लगे हवा में
अभी से उड़ने लगे हवा में
अभी तो शोहरत नई नई है
ख़मोश लब हैं झुकी हैं पलकें
दिलों में उल्फ़त नई नई है
ख़मोश लब हैं झुकी हैं पलकें
दिलों में उल्फ़त नई नई है
अभी तकल्लुफ़ है गुफ़्तुगू में
अभी तकल्लुफ़ है गुफ़्तुगू में
अभी मोहब्बत नई नई है
ख़मोश लब हैं झुकी हैं पलकें
दिलों में उल्फ़त नई नई है
लीजिए आप लोगों का जो पंसदिदा शेर है
जो ख़ानदानी रईस हैं वो
जो ख़ानदानी रईस हैं वो
मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना
एक बात बता दूँ Sir ये शेर जब से मुक़्क़म हुआ है
जो ख़ानदानी रईस हैं सारी दुनिया ख़ानदानी रईस हो गई है
जो ख़ानदानी रईस हैं वो
मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना
तुम्हारा लहजा बता रहा है
तुम्हारा लहजा बता रहा है
तुम्हारी दौलत नई नई है
ख़मोश लब हैं झुकी हैं पलकें
दिलों में उल्फ़त नई नई है
ख़मोश लब हैं झुकी हैं पलकें
दिलों में उल्फ़त नई नई है
बमों की बरसात हो रही है
बमों की बरसात हो रही है
पुराने जाँबाज़ सो रहे हैं
बमों की बरसात हो रही है
पुराने जाँबाज़ सो रहे हैं
बमों की बरसात हो रही है
पुराने जाँबाज़ सो रहे हैं
ग़ुलाम दुनिया को कर रहा है
ग़ुलाम दुनिया को कर रहा है
वो जिस की ताक़त नई नई है
ख़मोश लब हैं झुकी हैं पलकें
दिलों में उल्फ़त नई नई है
ख़मोश लब हैं झुकी हैं पलकें
दिलों में उल्फ़त नई नई है
अभी तकल्लुफ़ है गुफ़्तुगू में
अभी मोहब्बत नई नई है
ख़मोश लब हैं झुकी हैं पलकें
दिलों में उल्फ़त नई नई है
दिलों में उल्फ़त नई नई है
दिलों में उल्फ़त नई नई है



Writer(s): Shiv Ram, Yunus Mirza



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