Lyrics




काले, घनेरे अँधेरे जो हैं
रस्ता जो देते सवेरे को हैं
ज़रा सा और करना सबर
आने जो वाली सहर
सपने ये तेरे या मेरे जो हैं
पलकों पे डाले ये डेरे जो हैं
लोरी सुना देते ख़बर
आने ये वाली सहर
इंतज़ार और तमन्ना
हर क़दम वो साथ चले
साँझ से उभरती सुबह
में जाके वो घुल-मिल गए
इंतज़ार तू मेरा करना
इतने दिनों से कहानी जो है
होंठों पे बैठी, सुनानी जो है
है ये बड़ी ही बे-सबर
महफ़िल जो आई नज़र
इंतज़ार और तमन्ना
हर क़दम वो साथ चले
साँझ से उभरती सुबह
में जाके वो घुल-मिल गए
पेड़ों पे टाँगे ये झूले जो हैं
अब ना समाते, ये फ़ूले जो हैं
मौसम का है ही ये असर
लौटा कोई जो है घर
इंतज़ार और तमन्ना
हर क़दम साथ चले
साँझ से उभरती सुबह
में जाके वो घुल-मिल गए
समंदर को क्या बताना
गहरा कितना जाना
मोहब्बत का ये तराना
समझा बस अनजाना




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