Lyrics




छूपाकर मेरी आँखों को, वो पूछे कौन हैं जी हम
मैं कैसे नाम लू उनका, जो दिल में रहते हैं हरदम
ना जब तक देख ले वो दिल तो कैसे ऐतबार आये
तुम्हारे इस अदा पर भी, हमारे दिल को प्यार आये
तुम्हारी ये शिकायत भी मोहब्बत से नहीं है कम
नही हम यूं ना मानेंगे, तो कैसे तुम को समझाये
दिखा दो दिल हमें अपना, कहा से दिल को हम लाये
के दे रखा वो तुम को, दिखा सकते हैं कैसे हम?
दिया था किसलिए बोलो, अमानत ही तुम्हारी थी
ये जब तक पास था अपने, अजब सी बेकरारी थी
चलो छोड़ो गीले शिकवे, हुआ है चाँद भी मध्यम




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