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मंज़र बना पड़ा ख़ौफ़नाक है
मानव गिर पड़ा ख़ूँख़ार है
जीवन होने लगा दुश्वार है
दर्दनाक है, सूनसान है
मंज़र बना पड़ा ख़ौफ़नाक है
मानव गिर पड़ा ख़ूँख़ार है
जीवन होने लगा दुश्वार है
दर्दनाक है, सूनसान है
मंज़र बना पड़ा ख़ौफ़नाक है
मानव गिर पड़ा ख़ूँख़ार है
जीवन होने लगा दुश्वार है
दर्दनाक है, सूनसान है
नीयत से दूषित रूह
आने वाले कल से ये अनजान हैं
पापी बने सारे बलवान हैं
लाल उठा, देखो-देखो, तूफ़ान है
क्रोधित है, भ्रमित है
ऐसा है चक्रव्यूह
शक्तिशाली सम्मान पाए
वक़्त है कठिन, सब घबराएँ
चलते ये साए, आफ़त लाएँ
बेचैन नैन जी नहीं पाएँ
गूँज भरी पड़ी ज़ख़्मों से
मुँह लिपे हुए धब्बों से
भूक जगती है जंगों से
ऐसा ये मंथन
टूट रहा दम अंदर से
मूर्ख हैं सारे बंधक से
दूर फिर भी हैं रंगत से
ऐसा ये मंथन
मंज़र बना पड़ा ख़ौफ़नाक है
मानव गिर पड़ा ख़ूँख़ार है
जीवन होने लगा दुश्वार है
दर्दनाक है, सूनसान है
नीयत से दूषित रूह
आने वाले कल से ये अनजान हैं
पापी बने सारे बलवान हैं
लाल उठा, देखो-देखो, तूफ़ान है
क्रोधित है, भ्रमित है
मंज़र बना पड़ा ख़ौफ़नाक है
मानव गिर पड़ा ख़ूँख़ार है
जीवन होने लगा दुश्वार है
दर्दनाक है, सूनसान है



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