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राणाजी रुठे तो, राणाजी रुठे तो
राणाजी रुठे तो, म्हारो कांइ कारसी
मैं तो गाविंद रा गुण गास्या माँ
मैं तो गाविंद रा गुण गास्या माँ
राणजी रुठे तो म्हारो कांइ करसी
राणजी रुठे तो म्हारो कांइ करसी
हे माँ, हे माँ, हे माँ
राणजी रुठे तो नगरी राखे
राणजी रुठे तो नगरी राखे
हरि रुठया कीत जास्या माँ
म्हारां हरि रुठयां कीत जास्या माँ
मैं तो गाविंद रा गुण गास्या माँ
राणजी रुठे तो म्हारो कांइ करसी
राणजी रुठे तो म्हारो कांइ करसी
हे माँ, हे माँ, हे माँ
चरणामृत को नेम हमारो
नित उठ दर्शन पास्या माँ
नित उठ दर्शन पास्या माँ
मैं तो गाविंद रा गुण गास्या माँ
राणजी रुठे तो म्हारो कांइ करसी
राणजी रुठे तो म्हारो कांइ करसी
माँ, माँ, माँ
तन करुँ ताल, मन करुं डफली
हो मन करुं डफली
सोती सूरती जगास्या माँ
मैं तो गाविंद रा गुण गास्या माँ
माँ, माँ, माँ
राणाजी भेज्या नागभुजंगम
हो राणाए भेज्या नागभुजंगम
शालीग्राम करी जाण्या माँ
मैं तो गाविंद रा गुण गास्या माँ
राणजी रुठे तो म्हारो कांइ करसी
माँ, माँ, माँ
मीरा कहे प्रभु, गिरिधर नागर, हो
मीरा कहे प्रभु गिरिधर नागर
मीरा कहे, मीरा कहे प्रभु
गिरिधर नागर, गिरिधर नागर
हो गिरिधर नागर
मीरा कहे प्रभु गिरिधर नागर
नीरख परख गुण गास्या माँ
मैं तो गाविंद रा गुण गास्या माँ
राणजी रुठे तो म्हारो कांइ करसी
हो राणजी रुठे तो म्हारो कांइ करसी
माँ
राणजी रुठे तो म्हारो कांइ करसी
माँ



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