Shabbir Kumar - Tumne Di Awaz текст песни

Текст песни Tumne Di Awaz - Shabbir Kumar




प्रेमी हूँ, पागल हूँ मैं
(पागल हूँ मैं, पागल हूँ मैं)
रूप का आँचल हूँ मैं
(आँचल हूँ मैं, आँचल हूँ मैं)
प्यार का बादल हूँ मैं
पर्वतों से आज मैं टकरा गया
तुमने दी आवाज़, लो, मैं गया
हो, पर्वतों से आज मैं टकरा गया
तुमने दी आवाज़, लो, मैं गया
तुमने दी आवाज़, लो, मैं गया
तुम बुलाओ, मैं ना आऊँ, ऐसा हरजाई नहीं
हो, तुम बुलाओ, मैं ना आऊँ, ऐसा हरजाई नहीं
इतने दिन तुमको ही मेरी...
इतने दिन तुमको ही मेरी याद तक आई नहीं
गया यादों का मौसम, गया
तुमने दी आवाज़, लो, मैं गया
तुमने दी आवाज़, लो, मैं गया
उम्र ही ऐसी है कुछ ये, तुम किसी से पूछ लो
हाय, उम्र ही ऐसी है कुछ ये, तुम किसी से पूछ लो
एक साथी की ज़रूरत...
एक साथी की ज़रूरत पड़ती है हर एक को
दिल तुम्हारा इस लिए घबरा गया
तुमने दी आवाज़, लो, मैं गया
तुमने दी आवाज़, लो, मैं गया
खोल कर इन बंद आँखों को झरोखों की तरह
खोल कर इन बंद आँखों को झरोखों की तरह
चोर आवारा हवा पे...
चोर आवारा हवा पे मस्त झोंकों की तरह
रेशमी ज़ुल्फ़ों को मैं बिखरा गया
तुमने दी आवाज़, लो, मैं गया
हो, पर्वतों से आज मैं टकरा गया
तुमने दी आवाज़, लो, मैं गया
तुमने दी आवाज़, लो, मैं गया





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