Rattan Mohan Sharma - Shree Ram Chandra Kripalu Bhajmana - Studio текст песни

Текст песни Shree Ram Chandra Kripalu Bhajmana - Studio - Rattan Mohan Sharma



श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन हरण भवभय दारुणं
नव कंज लोचन कंज मुख कर कंज पद कंजारुणं ॥१॥
कन्दर्प अगणित अमित छवि नव नील नीरद सुन्दरं
पटपीत मानहुँ तडित रुचि शुचि नोमि जनक सुतावरं ॥२॥
भजु दीनबन्धु दिनेश दानव दैत्य वंश निकन्दनं
रघुनन्द आनन्द कन्द कोशल चन्द दशरथ नन्दनं ॥३॥
शिर मुकुट कुंडल तिलक चारु उदारु अङ्ग विभूषणं
आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खरदूषणं ॥४॥
इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनं
मम् हृदय कंज निवास कुरु कामादि खलदल गंजनं ॥५॥



Авторы: Rattan Mohan Sharma


Rattan Mohan Sharma - Rama
Альбом Rama
дата релиза
22-04-2011




Внимание! Не стесняйтесь оставлять отзывы.