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जलता है जो बाग़ में चिनार भी मेरा है
जगता है जो रात-भर वो ख़्वाब भी मेरा
चलते जब क़दम तेरे वो साया भी मेरा है
रूह बाती बँट गई, मैं रात-भर जलूँ
मैं हूँ, हूँ ना तुझमें? मैं हूँ
जिस्म चीर कह दूँ
नस में, रग में बह लूँ
मैं हूँ, मैं हूँ, हूँ ना तुझमें? मैं हूँ
जिस्म चीर कह दूँ
नस में, रग में बह लूँ
मैं हूँ, मैं हूँ
तू छाती से लगा तो रेशा-रेशा सीना बाँध लूँ
इन आँखों में दबा ये प्यार, आँसू-आँसू बाँट लूँ
तू पूछ के तो देख, तेरी सारी शर्त मान लूँ
बस एक बार, बस मुझको दिल से अपना मान तू
खिलता जिसमें हर गुलाब इश्क़ वो मेरा है
दफ़न जिसमें जंग हार कफ़न वो मेरा है
सूनी सेज, खोया चाँद, काल भी मेरा है
रूह बाती बँट गई, मैं रात-भर जलूँ
मैं हूँ, हूँ ना तुझमें? मैं हूँ
जिस्म चीर कह दूँ
नस में, रग में बह लूँ
मैं हूँ, मैं हूँ, हूँ ना तुझमें? मैं हूँ
जिस्म चीर कह दूँ
नस में, रग में बह लूँ
मैं हूँ, मैं हूँ
मैं हूँ



Авторы: Shashwat Sachdev, Sudhanshu Saria


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